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नीतीश कुमार का वोट बैंक हाथ से निकलती दिख रही है

नीतीश कुमार का वोट बिहार में कोइरी, कुर्मी, भूमियार,और कुछ अन्य अतिपिछड़ा जाती वोटर है

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नई दिल्ली

यह मात्र एक राजनीतिक सर्वे Report है।

बिहार के हिन्दू फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह इनदिनों नीतीश कुमार पर खफा चल रहे है,और कई TV चैनल, News वेवसाईट भाजपा के गिरिराज सिंह को मुख्यमंत्री के दावेदार भी बता रहे है। भाजपा और जदयू नेताओं के आपसी व्यान से मामला कुछ ठीक नही लगता है।

इन दिनों बिहार की जदयू सरकार भूमियार सामज को ध्वस्त करने में लगी है, नीतीश कुमार की जब सरकार आई थी , तब यादव समाज को निशाना पुलिस बना रही थी और आज भी कई जगह सरकार यादव को निशाना बना रही है।

नीतीश कुमार के शासन काल मे यादवो को चुन-चुन कर जेल में डलवाया गया, सजा करवाई गई ये हम नही कह रहे है ।

ये हमारे राजनीतिक सर्वे में बाते सामने आई है। आज उतर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बोलते है , की योगी की सरकार में सिर्फ यादवो को निशाना बना कर इनकाउंटर ,करवा जा रहा है , जेल में डलवाया जा रहा है।

 

अब बात करते है आज के विषय पर , आज का विषय नीतीश कुमार जी के वोट बैंक पर है। नीतीश कुमार जी सत्ता में जंगल राज को हटाने के नाम पर सत्ता में आये थे। लेकिन उनका सत्ता का रास्ता हर जिला में कही न कही कोई न कोई आपराधिक छवि के लोगो के वैशाखी के जरिये ही नीतीश कुमार जी ने अपना CM का रास्ता तय किया । 

कहि अनंत सिंह , कहि सूरजभान,कहि जगदीश शर्मा, कहि मुन्ना सुकला, सुनील पाड़े, और कई आपराधिक छवि दमंग लोग नीतीश कुमार जी को वैशाखी दे कर मुख्यमंत्री पद का नईया पर लगाया था , कल जो नीतीश जी के बहुत करीबी साथी थे आज नीतीश जी का उन्होंने साथ छोड़ दिया है। ये तो बात भूमियार समाज का था।

कोइरी समाज के भी बड़े नेता नीतीश कुमार कुमार के CM कुर्शी का वैशाखी का सहारा बने

जैसे  शहीद जगदेव बाबू के पुत्र नागमणि जिनका मगध और कई अन्य लोकसभा ,विधानसभा और झारखंड में भी इनका राजनीतिक रसूख है जो बिहार के लालु यादव के बाद दूसरे ऐसे नेता है जो इस लोकतंत्र के चारो 4 सदन के भी सदस्य रहे है इनकी कोइरी, यादव और मुसलमानों में खासा पकड़ है, इनकी पत्नी सुचित्रा सिन्हा भी नीतीश सरकार में मंत्री रही है, और आज ये भी बागी है। अभी रालोसपा के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा, भगवान कुशवाहा, सम्राट चौधरी और उनके पिता बड़े दिग्गज नेता , और भी कई बड़े नामी चेहरे थे , आज इन्होंने भी साथ छोड़ दिया।

एक यादव नेता भी नीतीश कुमार की वैशाखी थे -जिनका नाम शरद यादव है , उन्होंने नीतीश कुमार को अपने दम पर हर जगह खड़ा किया और राष्ट्रीय राजनीति का दरवाजा से रु व रूऊ कराया। वो भी अलग हो गए नीतीश कुमार से।

 

ये हमारी Report किसी जाति , धर्म को ठेस पहुचाना नही हमारी सर्वे की जातीय आधारित Report है।

बिहार के विकाश पुरुष कहे जाने वाले माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पुरानी आधार पतन की ओर अग्रसर है।
एक ऐसा दौर था जब भूमिहार जाती का प्रभुत्व था उनके दल में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर विशेष मंत्रालय में भी उनकी भागीदारी थी ,नीतीश कुमार तो सिर्फ नाम के प्रदेश के मुखिया थे अपितु सरकार तो भूमिहारों की थी।
नीतीश कुमार अपनी राजनीति को साधने के लिए इन बाहुबली भूमिहारो का बखूबी इस्तेमाल किया ।इससे यह प्रतीत होता है कि सरकार में बने रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार है
आज एक ऐसा समय है कि इन्ही बाहुबलियों को प्रताााड़ि करने  का  काम कर रहेे हैै।
नीतीश कुमार कुर्मी जाती से आते है उनकी बिहार के वोट में उनकी 2 प्रतिसत ही भागीदारी है,तो भी हमेशा सरकार में बने रहते हैं लेकिन 2020 के चुनाव में यह प्रतीत होता है कि इनके साथ जो भूमिहार जाती का भी मोह भंग हो गया है, ओर वह भी दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।
जब तक इनका काम सधता रहता है तब तक सारे बाहुबली की छवि साफ रहती है और इनके उद्देश्य पूर्ण होने के बाद उन्हें अपराधी भी साबित कर देते है।
2011 की भी एक मामला है दरौंदा विधानसभा की विधायक जगमतिया देवी की देहवासन के उपरांत उनके इकलौते पुत्र बाहुबली अजय सिंह जो कि अनेक आपराधिक मामलों में आरोपित थे ,उन्होंने इस सीट से अपनी दावेदारी पेश की परंतु अपनी छवि को बचाये रखने के लिए इन्होंने एक रास्ता निकाला पितृपक्ष में ही उनकी शादी करवा दी ओर उनकी पत्नी को टिकट दे दिया जिससे फिर उनकी उस सीट पर कब्जा हो गई।
इससे यह प्रतीत होता है कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांच सिद्ध करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है।

Reported by New Delhi Reporter

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